•   Jul / 02 / 2015 Thu 03:48:21 PM

विरोध प्रदर्शन देख झुक गई पाकिस्तानी सरकार! मौलाना फजलुर रहमान से बातचीत को तैयार

Nov 04 2019

विरोध प्रदर्शन देख झुक गई पाकिस्तानी सरकार! मौलाना फजलुर रहमान से बातचीत को तैयार

इंडिया इमोशंस न्यूज इस्लामाबाद। पाकिस्तान तहरीक-ए इंसाफ (पीटीआई) के नेतृत्व वाली सरकार की वार्ता टीम ने रक्षा मंत्री परवेज खट्टक की अध्यक्षता में सोमवार को जेयूआई-एफ प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान के साथ सीधी बातचीत करने का फैसला किया है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को सीनेट के अध्यक्ष सादिक संजरानी के आवास पर वार्ता टीम की एक बैठक के दौरान, सदस्यों ने बातचीत को सफल बनाने के लिए पीएमएल-क्यू के चौधरी शुजात हुसैन और चौधरी परवाह इलाही को भी शामिल करने पर सहमति व्यक्त की।

खट्टक और संजरानी के अलावा नेशनल असेंबली के स्पीकर असद कैसर, धार्मिक मामलों के संघीय मंत्री नूरुल हक कादरी, पीटीआई नेता असद उमर, आंतरिक मंत्री एजाज शाह आदि मौजूद रहे। संजरानी और कैसर ने चौधरी बंधुओं को शामिल करने का सुझाव दिया था, जिस पर बातचीत करने वाली टीम के सदस्य एकमत रहे। संजरानी ने कहा, हमें मसले को सुलझाने के लिए मौलाना फजल के साथ बातचीत करनी चाहिए।

मौलाना साहब अभी भी समझौते का पालन कर रहे हैं, इसलिए हमें उनसे बात करनी चाहिए। हमें धैर्य दिखाना चाहिए। कानून और व्यवस्था की स्थिति पर आंतरिक मंत्री ने कहा, अगर कोई भी अप्रिय स्थिति उत्पन्न होती है तो सभी सुरक्षा बल तैयार हैं। इस दौरान रक्षा मंत्री ने कहा, हम हमेशा बातचीत के लिए तैयार हैं। बैठक में निर्णय लिया गया कि विपक्ष के साथ बातचीत के दरवाजे हमेशा खुले रहेंगे। इस मौके पर सरकार की भविष्य की रणनीति पर भी चर्चा हुई।

इससे पहले प्रधानमंत्री इमरान खान के इस्तीफे को लेकर निर्धारित दो दिन की समय सीमा पर पाकिस्तान सरकार की ओर से कोई खास प्रतिक्रिया नहीं मिलने और प्रमुख विपक्षी दलों का भी खास सहयोग नहीं मिलने के बाद जेयूआई-एफ के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने यहां चल रहे अपने धरने को जारी रखने का फैसला किया और देशभर में विरोध प्रदर्शन फैलाने की धमकी दी।

डॉन न्यूज के मुताबिक, राजधानी के संवेदनशील रेड जोन क्षेत्र की ओर मार्च करने के अपने कथित फैसले के बाद, जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम सुप्रीमो ने रविवार को अपने समर्थकों से कहा कि वह भावी कदमों पर चर्चा के लिए सोमवार को विपक्षी दलों के प्रमुखों की बैठक बुलाने की कोशिश कर रहे हैं।

हालांकि, देश के दो सबसे बड़े विपक्षी दलों -पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के कई नेताओं और पदाधिकारियों ने कहा है कि उनके प्रमुखों शहबाज शरीफ और बिलावल भुट्टो-जरदारी के इतने कम समय में इस्लामाबाद पहुंचने की संभावना कम है।

रहमान ने फिर संकेत दिया कि उनकी डी-चौक या प्रधानमंत्री सदन की ओर बढऩे की कोई योजना नहीं है, लेकिन साथ ही यह भी घोषणा की कि सरकार को बेदखल करने के लिए उनका आंदोलन जारी रहेगा।

हालांकि, अपने कार्यकर्ताओं के डी-चौक की ओर मार्च नहीं करने के अपने फैसले का बचाव करते हुए, जिसके परिणामस्वरूप कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सीधे टकराव हो सकता है, जेयूआई-एफ प्रमुख ने दावा किया कि यह उनकी पार्टी थी, जिसने अब तक देश के युवाओं को हथियार उठाने और हिंसा और आक्रामकता से दूर रखा था।

उन्होंने कहा, आज कई पत्रकारों ने मुझसे बात की और उन्होंने हमारे संयम को हार के रूप में वर्णित किया। हम कहते हैं कि हम वापस चले जाएंगे, लेकिन केवल कुछ हासिल करने के बाद और सरकार के खिलाफ एक जबरदस्त हमला बोलने के बाद।

रहमान ने कहा कि आज हम इस्लामाबाद में जमा हुए हैं। कल हम पूरे देश में विरोध प्रदर्शन करेंगे और आप इसे देखेंगे। जेयूआई-एफ सुप्रीमो ने अपने सरकार विरोधी आजादी मार्च को अपनी पार्टी का प्लान ए करार दिया। उन्होंने कहा कि उनके पास प्लान बी और प्लान सी भी हैं। उन्होंने एक देशव्यापी विरोध प्रदर्शन और योजना बी और सी के हिस्से के रूप में पार्टी कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी देने के संकेत देते हुए कहा, आपकी (सरकार) जेलें कम पड़ जाएंगी। पाकिस्तान-तहरीक-ए-इंसाफ सरकार को गिराने के लिए जेयूआई-एफ द्वारा आहूत आजादी मार्च ने 31 अक्टूबर की रात इस्लामाबाद में प्रवेश किया था।

(IANS)