नेपाली मरीज को निजी अस्पताल में बंधक बना कर वशूली का आरोप, जांच के आदेश

Jun 30 2022

नेपाली मरीज को निजी अस्पताल में बंधक बना कर वशूली का आरोप, जांच के आदेश

लखनऊ। राजधानी में निजी अस्पतालों के दलालों का मकरजाल नेपाल तक फैला है। नेपाल से आने वाले मरीजों को शिफ्टिंग में दलालों को मोटी रकम निजी अस्पतालों से मिलती हैं। बुधवार को एक ऐसा मामला प्रकाश में आया है। नेपाल देश का निवासी प्रदीप (40) की आंतें फट गई थी। नेपाल से उसे लोहिया संस्थान भेजा गया था। लेकिन बार्डर पर एंबुलेस चालक ने परिजनों को बहलाया और डराया गया,कि सरकारी अस्पताल में इलाज अच्छा नहीं मिल पाएगा। मरीज की जान भी जा सकती है। एंबुलेंस चालक ने परिजनों को डर दिखाकर गोमतीनगर कठौता स्थित एक अस्पताल में ले जाकर भर्ती कराया।
आरोप है,कि निजी अस्पताल में ऑपरेशन के नाम पर करीब तीन लाख रुपए वसूल लिए गए। बिल के बाकी पैसे न मिलने पर मरीज को बंधक बनाया गया। रुपए लाने बाद ही मरीज को अस्पताल ने छोड़ा।
सुत्रों के मुताबिक राजधानी में नेपाली मरीजों का एक संगठित गिरोह संचालित हो रहा है। नेपाल से रेफर होने वाले मरीजों को सरकारी संस्थानों की बजाए उन्हें कमीशन खातिर निजी अस्पताल भेजा जा रहा है। इसमें जिले के पांच अस्पताल शामिल हैं।
इस मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता ममता त्रिपाठी ने शिकायत मुख्यमंत्री व पुलिस कमिश्नर से की है। सीएम कार्यालय से मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। जिसके बाद हड़कंप मचा हुआ है। शिकायकर्ता का आरोप है कि गोमतीनगर कठौता स्थित निजी अस्पताल, चौक, खदरा, पॉलीटेक्निक से फैजाबाद रोड स्थित एक निजी अस्पताल में सिर्फ नेपाली मरीज को भर्ती किए जाने का खेल चल रहा है। इन अस्पतालों में सामान्य मरीजों की बजाए नेपाली मरीजों की तादाद अधिक मिलती है।
राजधानी में हर रोज सरकारी संस्थानों में नेपाल से करीब दो से तीन गाड़ियां बॉर्डर पार करके आती है। इसमें एक भी मरीज सरकारी संस्थानों में भर्ती नहीं हो पाता है। सभी मरीज निजी अस्पतालों के जाल में फंसा लिए जाते है। उनसे इलाज के नाम पर मोटा शुल्क भी वसूला जाता है। बकाया होने पर परिजनों को नेपाल वापस भेजकर रकम मंगाने बाद ही मरीजों को छोड़ा जाता है।
सीएमओ डॉ. मनोज अग्रवाल ने बताया कि इस मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। इसपर नकेल कसने के लिए पुलिस की भी मदद ली जाएगी,ताकि इस खेल को रोका जा सके।