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पेट की इस समस्या से हैं परेशान तो न करें नजरअंदाज, नहीं तो पड़ेगी भारी

Posted on : May 18 2018


पेट की इस समस्या से हैं परेशान तो न करें नजरअंदाज, नहीं तो पड़ेगी भारी

इंडिया इमोशंस न्यूज लंबे समय तक पेट की खराबी को नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है। अगर इलाज कराने के बावजूद पेट संबंधित समस्या दूर नहीं हो रही है तो यह इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (आईबीडी) के लक्षण हो सकते हैं।

अव्यवस्थित जीवनशैली व फास्टफूड के अधिक सेवन से पेट की यह गंभीर बीमारी तेजी से बढ़ रही है। यह जानकारी एसपीजीआई के गैस्ट्रोलॉजी विभाग के प्रो. यूसी घोषाल से वर्ल्ड इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज डे की पूर्व संध्या पर आयोजित प्रेस वार्ता में दी। उन्होंने बताया कि अगर इलाज कराने के बावजूद पेट ठीक नहीं होता है तो तुरंत चिकित्सा संस्थान जाकर इलाज कराएं।

डॉ. यूसी घोषाल ने बताया कि अधिकतर डॉक्टर इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज की पहचान नहीं कर पाते। लक्षण के आधार पर वो मरीज का पाइल्स का इलाज करते रहते हैं। लाभ न होने पर डॉक्टर पाइल्स का ऑपरेशन तक कर देते हैं। ऐसे में परेशानी और बढ़ जाती है। ऐसे मरीज जब संस्थान तक आते हैं तो उनकी हालत काफी गंभीर हो चुकी होती है। शोध का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि देश में करीब डेढ़ लाख लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं।

डॉ. यूसी घोषाल बताते हैं कि इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज दो तरह की होती है। एक अल्सरेटिव कोलाइटिस, वहीं दूसरी क्रोंस बीमारी है। अल्सरेटिव कोलाइटिस में बड़ी आंत में घाव हो जाता है जिससे लगातार पतला दस्त के साथ ही खून आने लगता है। इसका पता कोलोनीस्कोपी जांच के जरिए ही लगाया जा सकता है। इसके अलावा क्रोंस डिजीज आंतों से जुड़ी एक बीमारी है।

इस बीमारी के कारण आंतों में लंबे समय के लिए सूजन आ जाती है, जिससे पाचन क्रिया प्रभावित होती है। लंबे समय तक इस बीमारी के प्रभाव में रहने से आंतों में छेद भी हो सकता है और ये जानलेवा हो सकता है। इसमें पेट दर्द, डायरिया, मल के साथ खून आना और तेजी से वजन घटना जैसे लक्षण होते हैं।

डॉ. यूसी घोषाल ने कहा अगर किसी को ऐसे लक्षण होते हैं तो कोलोनीस्कोपी जरूर कराएं। जौनपुर में किए गए एक सर्वे का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि एक गांव में करीब 17 फीसदी लोग पेट की बीमारी से पीड़ित थे। उनमें से महज तीन फीसदी मरीज एमबीबीएस डॉक्टर के पास इलाज कराने गए, पांच फीसदी होम्योपैथिक, आठ फीसदी आयुर्वेदिक तथा एक फीसदी लोग यूनानी के पास गए।

 



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