पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक का श्रेय किसी को नहीं लेना चाहिए : गडकरी

विस्तृत समाचार

जानिये रहस्य...'पारसमणि' को क्यों और किसने फेंका था कीरत सागर में

Posted on : Dec 20 2016


जानिये रहस्य...'पारसमणि' को क्यों और किसने फेंका था कीरत सागर में
सांकेतिक फोटो

तारा पाटकर, इंडिया इमोशंस, महोबा। मनिया देव एक चंदेल सामंत के ब्राह्मण थे जिन्होंने अपनी तपस्या से पारसमणि हासिल की थी। राजा परमार्दिदेव ने देखने के लिए पारसमणि ब्राह्मण से ले ली और कहा कि हम इस पत्थर की जांच करायेंगे। लेकिन बाद में पारसमणि ब्राह्मण को देने से इंकार कर दिया। राजा के इस व्यवहार से आहत ब्राह्मण ने चंदेल वंश के सर्वनाश का श्राप देते हुए परमार्दिदेव के सामने ही दरबार में कटार मारकर आत्महत्या कर ली। तब परमार्दिदेव को अपनी गलती का एहसास हुआ और वह स्वयं को ब्रह्म हत्या का दोषी मानने लगा। प्रायश्चित करने के लिए उसने मनिया देव का मंदिर बनवाया और इस हादसे का कारण बनी पारसमणि को कीरत सागर में फिंकवा दिया। अब यह मूर्ति खंडित हो चुकी है और मनिया देव मंदिर दुर्दशा का शिकार है। महोबा के एक अन्य प्रमुख तालाब मदन सागर के तट पर यह मंदिर स्थित है।

कीरत सागर में पारसमणि फेंकने के संबंध में महोबा के इतिहासविद संतोष पटैरिया बताते हैं कि सन 1182 की लड़ाई में पृथ्वीराज चौहान को भी भारी नुकसान हुआ था लेकिन वह युद्ध जीत गया था। महोबा के ऊदलए ताला सैयदए मलखानए लाखनए छत्रसाल व देवकरन बरई सहित सैकड़ों योद्धा मारे गये। उसके बाद पृथ्वीराज ने महोबा को बुरी तरह लूटा। राजा परमार्दिदेव को महारानी मल्हना के साथ यहां से भागना पड़ा। पारसमणि कहीं पृथ्वीराज के हाथ न लग जाये, इस डर से परमार्दिदेव ने उसे कीरत सागर में फिंकवा दिया और गया तीर्थ चले गये। पटैरिया जी कहते हैं कि काश, इन दोनों महाशक्ति चंदेल व चौहान राजा अपना वैमनस्य मिटाकर एक हो गये होते तो मुगल कभी भारत में हावी न हो पाते और हिन्दुस्तान को गुलाम न होना पडता। तेरहवी व पंद्रहवी शताब्दी में तो मुस्लिम आक्रमणकारियों ने इस क्षेत्र को न बुरी तरह लूटा बल्कि ऐतिहासिक स्मारकोंए मंदिरों व मठों में प्रतिष्ठापित मूर्तियों व कला-कृतियों को बुरी तरह ध्वस्त कर दिया।

कीरत सागर का तट देश की सूरत बदलने वाले उन दुर्भाग्यशाली क्षणों का एक प्रमुख साक्षी तो है ही। जहां तक पारसमणि की बात है तो कुछ ग्रंथों में ये भी उल्लेख मिलता है कि खजुराहो में 85 देवालयों की स्थापना के बाद एक विशाल यज्ञ हुआ था तब चंद्रवर्मन को चंद्रमा ने यह दुर्लभ पारसमणि दी थी। चंद्रवर्मन चंद्रमा व काशी के पुरोहित हेमराज की पुत्री हेमावती की संतान थे और चंद्रवर्मन ने ही 831 ईस्वी में चंदेल वंश की स्थापना की थी।



अन्य प्रमुख खबरे

Mahashivratri 2019: सत्य और शक्ति का दिन है महाशिवरात्रि, पढ़ें शिवजी का यह ध्यान मंत्र

इंडिया इमोशन्स न्यूज़ ‘शिव महिम्न: स्तोत्र' में प्रश्न है, ‘आप कैसे दिखते हैं शिव? हम आपका स्वरूप नहीं जानते

महाशिवरात्रि : बिल्व पत्र चढ़ाने से भगवान शिव होते हैं प्रसन्न, जानें इसके बारे में ये खास बातें

इंडिया इमोशन्स न्यूज़ भगवान शंकर जल्द प्रसन्न होने वाले देवता हैं। थोड़ी सी पूजा का बहुत-बड़ा फल प्रदान करते हैं

पूजा में चढाया हुआ नारियल यदि खराब निकल जाता हैं तो समझिए...

इंडिया इमोशन्स न्यूज़ नारियल को हर शुभ काम करने के लिए शुभ मानते हैं। उससे सारे काम शुभ तरीके से हो जाते हैं

आप भी करते है व्रत, जानिए क्या है इसके फायदें

इंडिया इमोशन्स न्यूज़ हिन्दू धर्म में व्रत करने की ज्यादा मान्यता देखने को मिलती है

इन पत्तों से करें गणेशजी की पूजा, सफल होंगे हर अधूरे काम...

इंडिया इमोशन्स न्यूज़ हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार, किसी भी शुभ काम के करने से पहले गणेश पूजन आवश्यक हैं

तो इसलिए महिलाएं छलनी से देखती हैं पति का चेहरा

इंडिया इमोशन्स न्यूज़ करवा चौथ का त्योहार पति-पत्नी के मजबूत रिश्ते, प्यार और विश्वास का प्रतीक है

शंख को इस जगह रखने से होता है लाभ, जानिए शंख के फायदे

इंडिया इमोशन्स न्यूज़ हिंदू धर्म में शंख का बहुत महत्व होता है

जानें, कब से शुरू होंगे नवरात्र

इंडिया इमोशन्स न्यूज़ नवरात्र के नौ दिन मां दुर्गा के नव रूपों की पूजा होती है

जानिए, सावन के महीने में नई शादीशुदा महिलाएं क्यों चली जाती हैं मायके

इंडिया इमोशन्स न्यूज़ सावन का महीना शुरू हो चुका है

अमरनाथ यात्राः जानिए, पवित्र गुफा का इतिहास और अमरत्व का रहस्य

इंडिया इमोशन्स न्यूज जम्मू-कश्मीर में श्री अमरनाथ की पवित्र गुफा की महिमा निराली है

लखनऊ समाचार

सेहत समाचार

बिज़नेस समाचार

धर्म संसार समाचार