•   Jul / 02 / 2015 Thu 03:48:21 PM

बटेश्वर नाथ : शिव की यह मूर्ति पूरी दुनिया में इकलौती, एक पंक्ति में 101 मंदिर...

Jul 26 2019

बटेश्वर नाथ : शिव की यह मूर्ति पूरी दुनिया में इकलौती, एक पंक्ति में 101 मंदिर...

इंडिया इमोशंस न्यूज दुनिया भर में कई मंदिर हैं जिनके पीछे कहानियां बहुत ही अनोखी और दिलचस्प है। भगवान शिव (God Shiva) के दुनिया भर में कई सारे मंदिर हैं और उन मंदिरों में बहुत श्रद्धा से अराधना की जाती है। लेकिन भारत में एक ऐसा भी शिव जी का मंदिर (Bateshwar Dham) है जहां मूर्तियां पूरी दुनिया में इकलौती हैं।

बटेश्वर नाथ मंदिर (Bateshwar Dham) बहुत प्राचीन मंदिर (Magnificent Temples In India) है। बटेश्वर यमुना नदी के तट पर आगरा (उत्तर प्रदेश) से 70 किमी की दूरी पर स्थित है। बटेश्वर एक समृद्ध इतिहास के साथ सबसे पुराने गांवों में से एक है। यहां मंदिर में शिव को डरावनी आंखों और मूंछों में दिखाया गया है, जबकि उनके और पार्वती के बैठने का अंदाज सेठ-सेठानी जैसा है। यह मूर्तियां पूरी दुनिया में इकलौती हैं।

यह भारत में महत्वपूर्ण आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र में से एक है। बटेश्वर स्थल यमुना और शौरीपुर के तट पर स्थित 101 शिव मंदिरों के लिए जाना जाता है। हिंदुओं के भगवान शिव के सम्मान में यमुना नदी तट पर स्थित बटेश्वर धाम की तीर्थयात्रा करते हैं। कुछ मंदिरों की दीवारों और छत में आज भी सुन्दर आकृतियां बनी हुई है। 22वें तीर्थंकर प्रभु नेमिनाथ शौरीपुर में पैदा हुआ थे। इस क्षेत्र के रूप में अच्छी तरह से जैन पर्यटकों को आकर्षित करती है।

यमुना के तट पर एक पंक्ति में 101 मंदिर स्थित हैं जिनको राजा बदन सिंह भदौरिया द्वारा बनाया गया था। राजा बदन सिंह ने यमुना नदी के प्रवाह को जो कभी पश्चिम से पूर्व कि ओर था उसको बदल कर पूर्व से पश्चिम की ओर अर्थात् बटेश्वर की तरफ कर दिया गया था। इन मंदिरों को यमुना नदी के प्रवाह से बचाने के लिए एक बांध का निर्माण भी राजा बदन सिंह भदौरिया द्वारा किया गया था। बटेश्वर नाथ मंदिर का रामायण, महाभारत, और मत्स्य पुराण के पवित्र ग्रंथों में इसके उल्लेख मिलता है।

इन मंदिरों में कामना पूरी होने के बाद घंटे चढ़ाए जाते हैं। यहां आज दो किलो से लेकर 80 किलो तक के पीतल के घंटे जंजीरों से लटके हैं। गौरीशंकर मंदिर में भगवान शिव, पार्वती और गणेश की एक दुर्लभ मूर्ति (फोटो में) है। साथ ही नंदी भी है, सामने दीवार पर मोर पर बैठे कार्तिकेय और सात घोड़ों पर सवार सूर्य की प्रतिमाएं है।

शिव को समर्पित इस विशाल मंदिर की दीवारों पर ऊंची गुंबददार छत है तथा इसका गर्भगृह रंगीन चित्रों से सुसज्जित है। गर्भगृह के सामने एक कलात्मक मंडप है। इस मंदिर में एक हजार मिट्टी के दीपकों का स्तंभ है जिसे सहस्र दीपक स्तंभ कहा जाता है।

बटेश्वर मंदिर में सावन का महीना बहुत ही अहम है। सावन के महीने में यह मेला के आयोजन किया जाता है। भक्त बटेश्वर बाबा पर गंगा जल अप्रीत करने के लिए बटेश्वर से लगभग 160 किलोमीटर दूर से गंगा जल भक्त अपनी कावर में लेकर आते है। बटेश्वर धाम में सावन महीनें के प्रत्येक सोमवार को ही कावर का जल अप्रीत किया जाता है। इस दौरान हजारों भक्त कावर लेकर बटेश्वर मंदिर में आते है। शिवरात्रि बटेश्वर मंदिर का प्रमुख त्योहार है।

कार्तिक शुक्ल पक्ष दूज से लगता है बहुत बडा मेला...
बाह से दस किलोमीटर उत्तर मे यमुना नदी के किनारे बाबा भोले नाथ का प्रसिद्ध स्थान बटेश्वर धाम है। यहां पर हर साल कार्तिक शुक्ल पक्ष दूज से बहुत बडा मेला लगता है, और भगवान शिव के एक सौ एक मन्दिर यमुना नदी के किनारे पर यहां के तत्कालीन राजा महाराज भदावर ने बनवाये थे।

बटेश्वर धाम कथा...
बटेश्वर धाम के लिये एक कथा कही जाती है, कि राजा भदावर के और तत्कालीन राजा परमार के यहां उनकी रानियो ने गर्भ धारण किया, और दोनो राजा एक अच्छे मित्र थे, दोनो के बीच समझौता हुआ कि जिसके भी कन्या होगी। वह दूसरे के पुत्र से शादी करेगा। राजा परमार और राजा भदावर दोनो के ही कन्या पैदा हो गई। और राजा भदावर ने परमार को सूचित कर दिया कि उनके पुत्र पैदा हुआ है। उनकी झूठी बात का परमार राजा को पता नही था। वे अपनी कन्या को पालते रहे और राजा भदावर के पुत्र से अपनी कन्या का विवाह करने के लिये बाट जोहते रहे।

जब राजा भदावर की कन्या को पता लगा कि उसके पिता ने झूठ बोलकर राजा परमार को उसकी लडकी से शादी का वचन दिया हुआ है, तो वह अपने पिता के वचन को पूरा करने के लिये भगवान शिव की आराधना यहीं बटेश्वर नामक स्थान पर करने लगी। जब राजा परमार की खबरें राजा भदावर के पास आने लगीं कि अब शादी जल्दी की जाये।

उधर राजा भदावर की कन्या अपने पिता की लाज रखने के लिये तपस्या करने लगी, और उसकी विनती न सुनी जाने के कारण उसने अपने पिता की लाज को बचाने हेतु यमुना नदी मे आत्महत्या के लिये छलांग लगा दी।

भगवान शिव की की गई आराधना का चम्त्कार हुआ, और वह कन्या पुरुष रूप मे इसी स्थान पर उत्पन हुई, राजा भदावर ने उसी कारण से इस स्थान पर एक सौ एक मन्दिरों का निर्माण करवाया, जो आज बटेश्वर नाम से प्रसिद्ध हैं। यहां पर यमुना नदी चार किलोमीटर तक उल्टी धारा के रूप मे बही हैं।